गैंगस्टर एक्ट पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, अपराध की कमाई साबित किए बिना नहीं होगी संपत्ति कुर्क

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी संपत्ति को जब्त करने से पहले राज्य सरकार के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि वह संपत्ति अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई है। अदालत ने कहा कि केवल आपराधिक मुकदमे दर्ज होना संपत्ति कुर्क करने का आधार नहीं बन सकता।

न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने देवरिया निवासी कमलेश्वर प्रताप उर्फ अप्पू की अपील स्वीकार करते हुए उनके मकान और मोटरसाइकिल की कुर्की निरस्त कर दी। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को दोनों संपत्तियां तत्काल वापस सौंपने का निर्देश दिया, बशर्ते वे किसी अन्य कानूनी कार्यवाही के लिए आवश्यक न हों।

डीएम ने 2022 में की थी कुर्की

मामले के अनुसार, तरकुलवा थाना क्षेत्र के मुंडेरबाबू गांव निवासी कमलेश्वर प्रताप के खिलाफ पुलिस ने आरोप लगाया था कि उन्होंने आबादी क्लॉज 6(2) की जमीन पर करीब 33.06 लाख रुपये का मकान अवैध रूप से बनवाया और अपराध से अर्जित धन से मोटरसाइकिल खरीदी। इन आरोपों के आधार पर अगस्त 2022 में जिलाधिकारी देवरिया ने यूपी गैंगस्टर एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 14(1) के तहत दोनों संपत्तियां कुर्क कर दी थीं। बाद में विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) ने भी फरवरी 2024 में इस कार्रवाई को बरकरार रखा था।

याची ने कोर्ट में रखे ये तर्क

अपीलकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि घटना के समय उसकी उम्र करीब 30 वर्ष थी, जबकि पुलिस रिपोर्ट में उसे 30 वर्षों से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त बताया गया, जो तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं है। यह भी कहा गया कि मकान उसके पिता उदय प्रताप सिंह के नाम पैतृक भूमि पर बना है और इसका निर्माण पिता तथा पत्नी कृष्णावती देवी द्वारा भूमि बिक्री से प्राप्त धन से कराया गया था। पत्नी को यह संपत्ति अपनी मां की वसीयत और पंजीकृत बैनामों के माध्यम से मिली थी, जिसे बाद में बेच दिया गया। याची ने यह भी दावा किया कि पुलिस रिपोर्ट में जिन लोगों को गवाह बताया गया, वे गांव के निवासी ही नहीं हैं।

अदालत ने संपत्ति अधिकार पर भी की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट का उद्देश्य किसी आरोपी की हर संपत्ति जब्त करना नहीं है, बल्कि केवल वही संपत्ति कुर्क की जा सकती है, जो अपराध की कमाई से अर्जित की गई हो। अदालत ने कहा कि संपत्ति का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत संरक्षित है और विधिसम्मत प्रक्रिया के बिना किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

सरकार को देना होगा ठोस प्रमाण

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार के लिए यह सिद्ध करना आवश्यक है कि संबंधित संपत्ति और कथित आपराधिक गतिविधि के बीच सीधा संबंध है। केवल संदेह या लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर कुर्की को उचित नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि प्रस्तुत विक्रय पत्र फर्जी थे या पिता के ठेकेदारी व्यवसाय से जुड़ा दावा गलत था। संदेह, प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता।

डीएम और विशेष अदालत के आदेश रद्द

हाई कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) के 20 फरवरी 2024 के आदेश के साथ ही जिलाधिकारी देवरिया द्वारा 5 अगस्त और 17 अक्टूबर 2022 को जारी कुर्की आदेशों को भी निरस्त कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि मकान और मोटरसाइकिल तत्काल अपीलकर्ता को वापस सौंपी जाए।

 

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